थकी और घिसी उँगलियों, भारी लाल पलकों के साथ, एक स्त्री फटेहाल चिथड़ों में बैठी सुई-धागा चलाती थी—सीओ! सीओ! सीओ!
थॉमस हुड
अपनी गति से, एक-एक पंक्ति।