वह छाती तक ऊँची फसल के बीच खड़ी थी, सुबह की सुनहरी रोशनी से घिरी, मानो सूर्य की प्रिया हो जिसे अनगिनत दहकते चुंबन मिले हों।
थॉमस हुड
वह छाती तक ऊँची फसल के बीच खड़ी थी, सुबह की सुनहरी रोशनी से घिरी, मानो सूर्य की प्रिया हो जिसे अनगिनत दहकते चुंबन मिले हों।
थॉमस हुड