सच्चे मनों के मिलन में मैं बाधाएँ न मानूँ; बदलाव पाकर बदल जाने वाला प्रेम, प्रेम नहीं।
विलियम शेक्सपियर
अपनी गति से, एक-एक पंक्ति।