व्यंग्य मेरा हथियार है, पर मैं इतना विवेकी हूँ कि उन्मत्त होकर हर मिलने वाले पर वार न करूँ।
अलेक्ज़ेंडर पोप
अपनी गति से, एक-एक पंक्ति।