दुखियों की तीखी पीड़ाएँ भी उस नीरस शून्य, मन के पत्ताविहीन मरुस्थल, अनुपयोगी भावों के उजाड़ से बेहतर उल्लास हैं।
लॉर्ड बायरन
अपनी गति से, एक-एक पंक्ति।