दिव्य दर्शन कितना मनोहर है! मूर्खों के अनुमान-सा कठोर और रूखा नहीं, बल्कि अपोलो के वाद्य-सा संगीतमय, अमृत-मिठास का निरंतर भोज, जहाँ भद्दा अतिभोजन नहीं।जॉन मिल्टनटाइप करना शुरू करें