वर्ष के बाद वर्ष रोज़ कुछ चुराते हैं; अंत में हमें हमसे ही चुरा ले जाते हैं।

अलेक्ज़ेंडर पोप

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स्रोत

Satires, Epistles, and Odes of Horace. Epistle ii. Book ii. Line 72. · Typing Ink का अनुवाद