आशा मानव हृदय में अनंत फूटती है; मनुष्य कभी सुखी होता नहीं, सदा होने वाला होता है। घर से दूर बँधी बेचैन आत्मा आने वाले जीवन में विश्राम करती और खुलकर विचरती है।

अलेक्ज़ेंडर पोप

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स्रोत

Essay on Man. Epistle i. Line 95. · Typing Ink का अनुवाद