आशा मानव हृदय में अनंत फूटती है; मनुष्य कभी सुखी होता नहीं, सदा होने वाला होता है। घर से दूर बँधी बेचैन आत्मा आने वाले जीवन में विश्राम करती और खुलकर विचरती है।अलेक्ज़ेंडर पोपटाइप करना शुरू करें