Typing Ink

कविता

ओज़िमैंडियस · अंश

मैं एक प्राचीन देश से आए यात्री से मिला। उसने कहा: पत्थर की दो विशाल टाँगें, बिना धड़ के, रेगिस्तान में खड़ी हैं। पास ही रेत पर एक टूटा चेहरा आधा ध…

भाग · 1

मैं एक प्राचीन देश से आए यात्री से मिला। उसने कहा: पत्थर की दो विशाल टाँगें, बिना धड़ के, रेगिस्तान में खड़ी हैं। पास ही रेत पर एक टूटा चेहरा आधा धँसा है; उसकी त्योरियाँ, सिकुड़े होंठ और ठंडे हुक्म की हँसी बताते हैं कि मूर्तिकार ने उन भावनाओं को अच्छी तरह समझा था। बेजान पत्थरों पर उकेरी वे भावनाएँ आज भी बची हैं, उन्हें उतारने वाले हाथ और पालने वाले हृदय से भी अधिक समय तक।

स्रोत और अधिकार

रचना
ओज़िमैंडियस
संस्करण
अंग्रेज़ी मूल से नया अनुवाद
अधिकार
सार्वजनिक डोमेन का मूल पाठ; Typing Ink का नया अनुवाद।

अभ्यास लक्ष्य

  • अभ्यास लक्ष्य
  1. भाग 1

    मैं एक प्राचीन देश से आए यात्री से मिला। उसने कहा: पत्थर की दो विशाल टाँगें, बिना धड़ के, रेगिस्तान में खड़ी हैं। पास ही रेत पर एक टूटा चेहरा आधा धँसा है; उसकी त्योरियाँ, सिकुड़े होंठ और ठंडे हुक्म की हँसी बताते हैं कि मूर्तिकार ने उन भावनाओं को अच्छी तरह समझा था। बेजान पत्थरों पर उकेरी वे भावनाएँ आज भी बची हैं, उन्हें उतारने वाले हाथ और पालने वाले हृदय से भी अधिक समय तक।

    यह भाग शुरू करें